Rebit and Khargosh Story : खरगोश और कछुआ की सफलता की नई कहानी

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मुझे विश्वास है कि आप ने खरगोश और कछुए की कहानी अवश्य सुनी होगी जिनकी आपस मैं प्रतियोगिता हुई और कछुए ने खरगोश को हरा दिया और यह शिक्षा दी है | कि धीमे और निरंतरता से चलने वाले को जीत मिलती है|


मैं क्षमा चाहता हूं निरंतर कार्य करने वाले लोग तो दौड़ जीत सकते हैं परंतु धीमे लोग कभी नहीं मैं आपको आधुनिक व्यावसायिक खरगोश और कछुए की कहानी सुना रहा हूं | मुझे विश्वास है कि यह आपको रुचि-कर भी लगेगी और आपका ज्ञानवर्धन भी करेगी|


एक बार एक खरगोश और कछुए एक बहु राष्ट्रीय कंपनी में कार्य कर रहे थे | एक दिन उनमें एक गरमा गरम बहस हुई | कि कौन श्रेष्ठ है और उन्होंने एक दूसरे को दौड़ लगाने के लिए चुनौती दी और दौड़ के लिए रास्ता और दिन भी निश्चित कर लिया | दौड़ वाले दिन बहुत से लोग इसे देखने के लिए पहुंचे | कुछ प्रशंसा करने के लिए कुछ आनंद लेने के लिए –

कुछ टाँग खींचने के लिये , कुछ हंसी मज़ाक करने के लिए , कुछ और कुछ केवल बातचीत करने के लिए जैसे कि आप किसी भी व्यवसाय की सभा में देखते हैं|


जब दौड़ आरंभ हुई तो खरगोश बहुत तेज भागा कछुए को पीछे छोड़ दिया कुछ समय बाद उसने सोचा कि कछुआ उसे कभी हरा नहीं सकता और वह कभी भी जीत सकता है तो उसने दौर समाप्त होने से पहले थोड़ा आराम करने का सोचा वह एक पेड़ के नीचे बैठ गया थोड़ा आराम करने के लिए ,परंतु सो गया स्थिरता से चलने वाला कछुआ उसी गति से चलता रहा (भागता नहीं) और सोए हुए खरगोश को पार करते हुए उसने दौड़ जीत ली|

कहानी से शिक्षा

धीमे और निरंतरता से चलने वाले लोग दौड़ में जीत जाते हैं| इस बार की कहानी यहाँ समाप्त नहीं होती| निश्चित रूप से दौड़ हारने के बाद खरगोश को बहुत बुरा लगा परंतु उसे इसका कारण पता चल गया उसे एहसास हुआ कि यह दौड़ वह अति आत्मविश्वास और लापरवाही के कारण हार गया|


उसने सोचा कि यदि वह इस कमज़ोरी पर कार्य कर लेता है तो वह दौड़ जीत सकता है | उसने दोबारा कछुए को दोबारा चुनौती दी और मिलो के अंतर से दौड़ जीत गया|

अब कहानी से शिक्षा

तेजी और निरंतरता सदा ही धीमेपन और स्थिरता को हरा देते हैं|

परंतु कछुए और खरगोश की कहानी यहां पर समाप्त नहीं होती | इस बार कछुए ने कुछ सोचा और उसे एहसास हुआ| कि दौड़ के वर्तमान प्रारूप में तो खरगोश को दौड़ में हराना संभव नहीं है उसने कुछ पल के लिए सोचा और खरगोश को एक और दौड़ के लिए चुनौती दी |
इस बार दौड़ का रास्ता थोड़ा अलग था|

दौड़ आरंभ हुई और नियमित प्रदर्शक धावक की भांति खरगोश ने दौड़ शुरू किया और अपने अधिकतम गति से भागा जब तक वह नदी के तट तक नहीं पहुंचा दौड़ समाप्त होने की अंतिम रेखा कुछ किलोमीटर की दूर और नदी के दूसरे तरफ थी|


खरगोश अचंभित होकर वहां बैठ गया कि अब वह क्या करें क्योंकि वह तैर नहीं सकता था| इसलिए वह लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकता था | इतने में कछुआ नदी के किनारे आ गया हालांकि बहुत देर बाद धीरे-धीरे चलते हुए नदी में गया और विपरीत दिशा की ओर तैरने लगा उसने नदी पार की और वह दौड़ते हुए न कि चलते हुए लक्ष्य तक पहुंच गया और दोबारा से दौड़ जीत गया|

पहले अपनी मूल शक्ति को पहचानो और फिर खेल के मैदान को अपनी मूल शक्ति के अनुसार बदलो|

कहानी अब भी यहां समाप्त नहीं होती

इस समय तक खरगोश और कछुआ बहुत अच्छे मित्र बन गए थे | उन्होंने एक साथ मिलकर कुछ सोचा दोनो ने महसूस किया कि कि पिछले दोडो में वे कुछ अच्छा नहीं कर पाए | इसलिए उन्होंने दोबारा दौड़ लगाने का निश्चय किया परंतु इस बार एक दल के रूप में दौड़ लगने का निश्चय किया|

वह एक साथ दौड़े ‘और इस बार खरगोश ने नदी के किनारे तक कछुए को अपने पीठ पर बैठाया और उसके बाद कछुआ खरगोश को अपनी पीठ पर बैठा कर नदी के उस पार तक तैरा नदी के दूसरे किनारे पर जाकर खरगोश ने दोबारा कछुए को अपने पीठ पर बिठाया और बहुत जल्द ही दोनो अपनी मंज़िल तक पहुंच गए उन्हें एक गहरी संतुष्टि प्राप्त हुई | जो उनको पहले कभी नहीं हुई थी|

वो दोनों ही विजेता थे और उन्होंने कम से कम समय में यह दौड़ पूरी कर एक कीर्तिमान स्थापित किया था|

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