Power of Unity story hindi : एकता की शक्ति सबसे बेहतर होती है|

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Power of Unity story hindi
Power of Unity story hindi

मिस्र के एक शहर में रमजानी नामक एक भला इन्सान रहा करता था उसके चार बेटे थे ! आदिल खलील ,सिदीक तथा अमीन । रमजानी मेहनती ईमानदार और सबसे मेल जोल रखने वाला था । लोग उसकी शराफत की कद्र करते थे वह विधुर था उसकी पत्नी कुछ साल पहले मर गई थी रमजानी के चारो बेटे जवान और बाल बच्चेदार हो गए थे ! बेटों के जवान और बाल बच्चेदार हो जाने के बाद भी रमजानी खुश न था | इसकी वजह यह थी कि चारो एक ही घर में उसके साथ रहते हुए भी एक – दूसरे से मेल जोल न रखते थे । हर एक का चूल्हा – चौका अलग था ! घर मे रहते हुए चारो की पीठ एक – दूसरे की ओर रहती थी|

किसी के यहां दुख बीमारी हो तो पड़ोसी को खबर हो जाए पर घर मे रहने वाले भाइयो को खबर न हो पाती थी किसी के यहां चूल्हा नही जला है तो कोई पूछने वाला न था | कि बच्चे भूख से सो गए या खाना खाकर सोय है | बेटो की ऐसी स्थिति देखकर रमजानी ने उन्हें बार बार समझाया पर किसी पर रत्ती भर भी असर न हुआ उनका यह स्वभाव युवा अवस्था मे ही कदम रखने के साथ शुरू हुवा था, 0औऱ अब तक चल रहा है|

यह स्वभाव शुरू हूवा सबसे बड़े आदिल के कारण उसने अपने से दो वर्ष छोटे खलील को लड़को से लड़ाई – झगड़ा करते देख एक दिन डाटा पीटा था तो खलील ने पलटकर जवाब दे दिया था ! रमजानी ने बड़े भाई को जवाब देने पर खलील को उस दिन से खलील ने आदिल की और देखना भी बन्द कर दिया था|

खलील ने अपने से बड़ो की अवज्ञा की थी ! तो उससे छोटे सिद्दीक और अमीन भी देखा देखी एक दूसरे का जिहाज छोड़ बैठे थे | इस सिदकी चारों को अलग – अलग मुह किये बरसो गुजर गये थे गनीमत यह थी कि चारो आपस में सिर फुटवल न करते थे – बस उनकी गनीमत छिन्न भिन्न धी हर कोई अपना कमाता अपना खाता था । रमजानी का बुडापे की वजह से स्वास्थ्य गिरने लगा|

बेटो की एकता छिन्न भिन्न रहने की वजह से चिंतित होकर उसने अपने मिलने – जुलने वालो हमदर्दों से मशवरा किया । लोगों ने बेटो को समझाया पर किसी भी तरह से न माने रमजानी ने बस्ती के उमर फाखरी नामक महाजन से भी सलाह ली । वह वहा का सबसे धनवान व्यक्ति था लोग वक़्त जरूरत दुख परेशानी शादी -ब्याह पर उमर फाखरी से कर्ज लेते थे इसलिए हर कोई उसका जिहाज करता था !

महाजन उमर फाखरी रमजानी की समस्या काफी दिनों से सुनता आ रहा था उसने बेटों से बात करने जाने की बात टाल दी | क्योंकि उनको जाकर समझाना भैस के आगे बीन बजाने जैसी बात थी उसने रमजानी को सुझाव दिया और कहा कि सब ठीक हो जाएगा । एक दिन बुढ़ापे के रोग से ग्रस्त रमजानी की मौत हो गयी चारों बेटों ने अंतिम संस्कार दिया|

अंतिम संस्कार कर आने के बाद चारों के मुह अलग – अलग दिशाओं में हो गये रमजानी ने कोई सम्पदा छोडी न थी । जिसमे वे बँटवारे के लिए वे मिलकर बैठते या झगड़ा करते चारों का अलग कमाने अलग खाना पहले के जैसा शुरू हो गया । कुछ दिन गुजरे – एक दिन उमर फाखुरी सुबह सुबह उनके द्वार पर आया । उसके बगल में वही खाता दस्तावेज दबे हुऐ थे उसने रमजानी के चारों बेटों को बुलाया उनके उनके सामने दस्तावेज और वही बहीखाता दस्तार पेश कर दिये चारों चौके उनके पैरो के नीचे से मानो जमीन खिसकने लगी|

दस्तावेज और लिखा – पढ़ी में जो बात सामने आई उसके अनुसार मौत से दो साल पहले से रमजानी ने अपने गुजारे के लिए फाखुरी महाजन से कर्ज लेना शुरू किया था | मकान को गिरवी रख दिया था तथा मियाद तीन साल की रख दी थी । मरते मरते दो वर्ष गुजर गए थे कर्ज पांच हजार का छोड़ गया था ! लिखा पढ़ी के मुताबिक यदि तीन साल के अन्दर पांच हजार का कर्ज चुकता न हुआ तो आपको ये घर खाली करना होगा|

चारो अलग अलग बोली बोलने लगे पिताजी ने तो हमे बताया ही नही एक साल के अंदर मकान का पांच हजार कौन अदा करेगा । यह कैसे हो सकता है|

मकान पुश्तैनी है हम छोड़कर कहा जाएंगे यह तो बुरा हुआ । “उस समय तक आते – जाते लोग इकट्ठा हो चुके थे ।एक बुजुर्ग ने कहा एक बाप ने चार बेटों को पाला चार बेटे मिलकर एक बाप को पाल न सके | रमजानी बेचारा बीमारी की हालत में क्या करता महाजन से कर्ज उधर न लेता तो दवा इलाज का इन्तजाम कहा से करता । खाता कहा से तुम चारों ने कभी एक वक्त की भी अपने बाप की सुध ली | कि बाप खाता कहा से है , पहनता कहा से है कहने वाले बुजुर्ग सम्मानित थे|

चारों बगले झांकने लगे जवाब क्या देते । जो हो गया था यह अक्षर सच था । लोगो ने भी एक स्वर में दबाव देकर कहा कि महाजन का कर्ज एक साल में अदा करना ही होगा वरना मकान छोड़ना होगा । लोग दबाव बनाकर और महाजन अपना फरमान जारी कर चला गया । एक साल बाद मकान हाथ से जाने की चिंता में उस दिन चारों मकान के आंगन में एक दूसरे की ओर मुह करके बैठे । विचार – विमर्श किया पर कोई न निकला। जो बोले उसे ही कुण्डी खोलने वाली बात थी|

जो मशवरा देता उसे ही महाजन का कर्ज़ अदा करने के लिए आगे बढ़ना पड़ता किसी की आर्थिक स्थिति ऐसी थी नहीं उस दिन चिंता के घिरे चारों काम काज पर भी न गये | दोपहर से शाम हो गई शाम को रमजानी का एक दोस्त शहरयार घर आया । उसकी शहर में परचून की थोक की दुकान थी | उसने आकर उनकी समस्या सुनी निदान सुझाया|

मेरे पास एक रास्ता है – तुम चारो मेरे यहां से परचून के समान लाओ बस्ती में कोई दुकान नहीं है ! दो भाई सुबह – शाम मेरे यही से समान लाने के कार्य में लग जाओ – और दो भाई दुकान सम्भालने में लगे तो में जिम्मा लेता हैं कि एक साल से पहले तुम्हारा कर्ज भी अदा हो जाएगा तथा खा पीकर कुछ बच भी जाएगा। जिम्मा लेते हैं चचा शहरयार तो फिर हम वैसा ही करेंगे जैसा आप कहेंगे|

बड़े आदिल ने कहा- तुम क्या कहते हो । खलील , सिद्धिक ,अमीन शहरयार ने पूछा :
हम भी वही कहते हैं जो भईया आदिल कहते हैं । बरसों बाद तीन छोटे ने बडे को भईया कहकर सम्भोधित किया था ठीक है | कल चारों सुबह मेरी दुकान पर आ जाना। शहरयार ने फैसला सुनाया और वापस शहर को रवाना हो गया अगले दिन चारों भाई शहरयार के पास गये। बरसों बाद चारो भाई एक साथ किसी जगह गये थे|

शहरयार ने उन्हें परचून के सामानों के बोरे बांध दिये। आदिल को तीनों का सरपरस्त बनाया। सबको अलग अलग काम समझाया – जिसे आदिल के मशवरे पर उन्हें करना था। ये काम पर लगे। आबिल के मशवरे और शाहरयार की सलाह पर काम होने लगा। चारों में बातचीत भी हुई । सिर भी मिले। दिन रात की मेहनत शुरू हुई छोटे – छोटे सामान के लिए वे शहर के दौड़ पडते हैं। सामान लाते लोगों की जरूरत पूरी करते | इस तरह शहरयार के मशवरे पर अमल करते ही दुकान चल निकली।

चारों की आखे महीने भर में ही खुल गयी ! जब उन्होंने पाया कि खा पीकर शहर के सामानों की कीमत अदाकर उन्हें पाच सो का मुनाफा हुआ है। अगले महीने मुनाफा दुना हो गया क्योंकि अब सामान की कीमत से नकद चुकाने लगे थे चारो इसी तरह से मिलकर मेहनत करते रहे छ: महीने गुजरते ही उनके पास साहूकार फाखरी के कर्ज चुकाने के पैसे जुट गए।

चारों ओर सहरयार से मशवरा करके कर्ज चुकाने की बात सोची। शहरयार ने “हा” कर दी। उनकी पीठ भी थपथपाई और कहा कल दोपहर में फाखुरी के घर मौजूद रहूंगा | ताकि तुम मेरे सामने कर्ज चूका सको और मकान के लिखा पढी के कागज मेरे सामने वापस मिले । चारों ने इस बात को सही माना।

अगले दिन – रमजानी के चारों बैठे पांच हजार रुपए लिए फाखरी के घर पहुंचे। वहाँ शहरयार भी मौजूद मिला। “

आ गये तुम ।
फिर आदिल ने मुँह खोला हम पाँच हज़ार रुपये लाये हैं – रुपये लीजिये । कागज़ वापस कीजिए ! कागज़ हाँ “फाखुरी ने जेब से कागज निकाला । उन्होंने दिखाया और उसे फाड़ दिया रुपयो की थैली उन चारो की और सरकाकर – मुस्कराता हुआ बोला यह कागज आज तक के दिन के लिए था |अब न इसकी जरूरत मुझे है और न तुम्हे इसलिए मैंने फाड़ दिया अपने रुपए संभालकर काम धंधे में लग जाओ – रमजानी ने हमसे कोई कर्ज नहीं लिया था।

क्या “चारों चौके -” फिर वह रुका आप चारों के दिमाग दुरूस्त करने के लिए था।।आपमें एकता बनाने के लिए था। रमजानी और शहरयार ने एक स्वर में कहा फिर ठहाका मारकर हंसने लगे। हंसी रोक कर फ़ाखुरी ने और शहरयार ने बताया कि रमजानी फाखुरी और शहरयार ने मिलकर उनके मिजाज दुरूस्त करने के लिए यह योजना बनायी थी सुनकर चारों भाई शर्मिन्दा हुए और वायदा किया कि भविष्य में भी वे एक ही रहेंगे|

सीख एकता में वह शक्ति होती है कि मिलकर करने पर बरसों का काम महीनों में पूरा हो जाता है।

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