Dar Kya Hai : अपने डर को कैसे दूर करे | What is Fear

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डर Fear इंसान के अंदर का एक ऐसा गुण है जो उसे कभी आगे बढ़ने नहीं देता है ! जब भी इंसान किसी कार्य को करने की बात मन में लाता है तो आपके अंदर का मन उभर कर बोलता है रहने दे | तुझसे नहीं हो पाएगा | तुम्हारा नुकसान हो सकता है किसी काम को ना करने के तरह-तरह के बहाने मन में आने लगते हैं , जिसके कारण आप एक्शन नहीं ले पाते हो |

लेकिन आप यह भी जानते हो कि डर की इस किस्म से काम नहीं चलता है ! कोई दूसरा आपका डर दूर करने के लिए केवल सांत्वना दे सकता है , तो वह कुछ देर के लिए ही काम करती है | उसके बाद ग़ायब हो जाती है दोस्तों डर वास्तविक ही होता है | परंतु डर की असली वजह क्या है उस पर भी फोकस करना जरूरी होता है | क्योंकि पूरी जिंदगी आप डर में रहकर नहीं गुजार सकते है |

बिना डर की गहराई को जाने आप डर को नहीं भगा सकते हैं | इंसानों के अंदर ज्यादातर डर चिंता करना, तनाव में रहना, उलझने में फसे रहना, हमारी नकारात्मकता और अनुशासन कल्पना के कारण हमारे अंदर ही उत्पन्न होने लगता है | अब अगर आप यह भी जान गए है कि डर कैसे पैदा होता है , तो अब आपको ड़र दूर करने के उपाय भी जानने होंगे तभी आप अपने डर पर पर नियंत्रण पा सकते है |

डॉक्टर बीमारी जानने के बाद इलाज करता है तभी उसका कार्य पूरा माना जाता है ! कुछ लोगों को लगता है – कि ड़र केवल मन का वहम है बाकी कुछ नहीं दोस्तों डर वास्तव में असली होता है | डर आप के अंदरूनी मन के मुताबिक कार्य करता है, अगर आप किसी भी कार्य को देखकर डर जाते है या किसी चीज से डरते है | ड़र वास्तविक है आपको इसे भगाने के पर उपाय खोजने होंगे , लेकिन यह बात भी सत्य है जिन लोगों के मन में डर का प्रारूप बड़ा हो जाता है वो जीवन मे कुछ खास तरक्की नहीं कर पाते हैं |

डर इंसान की सफलता में बाधा डालने वाला नम्बर एक कारक है ! जो लोगों को अवसर का लाभ उठाने के लिए आगे बढ़ने से रोके रखता है | डर इंसान को शारीरिक एवं मानसिक रूप से कमजोर बना देता है | सोचने की शक्ति कम कर देता है | डर की वजह से आप अपनी जिंदगी को खुलकर जी नहीं पाते हैं | जिंदगी का आनंद नहीं उठा पाते हैं |

डर की वजह से आप अपनी बातों को खुल कर दूसरों तक नहीं पहुंचा पाते हैं | जो लोग अपने अंदर से डर निकाल देते हैं वही लोग दुनिया के लिए मिसाल भी बन जाते हैं ! वह जान जाते हैं कि उतार-चढ़ाव जिंदगी का हिस्सा है | हर पल आपके साथ केवल अच्छा नहीं हो सकता हर पल आप अपने मुताबिक कार्य नहीं कर सकते |

जिनके अंदर से डर निकल जाता है, वे हमेशा रिस्क उठाने से भी नहीं घबराते हैं क्योंकि बिना रिस्क लिए आप कुछ भी हासिल नहीं कर सकते | डर इंसान को किसी न किसी रूप में आगे बढ़ने से रोके रखता है जिसके कारण आप कुछ नहीं कर पाते हैं | वहीं के वही रह जाते हैं | इंसान मैं डर जैसी बीमारी बचपन से ही पनपने लगती है |

बचपन में स्कूल जाते समय अध्यापकों का डर, परीक्षाओ के समय फेल होने का डर, बड़े होने पर नौकरी न मिलने का डर, नौकरी लगने के बाद बॉस का डर, घर में बीवी का डर, यानि की हर जगह इंसान डर से गिरा हुआ रहता है |

डर से कैसे बाहर आना है यह उसकी शिक्षा और पालन-पोषण पर निर्भर करता है
डर प्रत्येक इंसान के जीवन का हिस्सा है एक डर ही होता है | जिसके कारण इंसान गलत कामों से दूर रहता है | लेकिन ये डर कभी-कभी आपके मन मे इतना हावी हो जाता है कि आपको अंदर से जकड़ लेता है और आप सही कार्यो को भी करने से भी डरने लगते है | जिनको करके आप अपना जीवन भी बदल सकते है | मनुष्य में ज्यादातर डर आत्मविश्वास की कमी के कारण पैदा होते है |

अगर आपको किसी कार्य को लेकर स्वयं पर विश्वास नहीं है तो आप जीवन में कभी सफलता प्राप्त नहीं कर सकते किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले स्वयं पर विश्वास होना बेहद जरूरी है नहीं तो आप डर के कारण किसी कार्य की शुरुआत भी नही कर पाओगे |

अगर आप किसी कार्य को करने से डरते है और आपको पता है कि ये कार्य मेरे लिये सही है , तो उस कार्य को आप थोड़ी सी हिम्मत दिखा-कर जरूर करे डर हमेशा के लिए खत्म हो जायेगा ! जैसे बचपन मे जब हम पहला कदम उठाते है तो गिर जाते है लेकिन अगर आप गिरने के डर से चलने का प्रयास करना छोड़ दे तो क्या आप कभी चलना सीख पाओगे – बिलकुल नहीं ?

जीवन में इंसान गलती करके ही सीखता है जिस इंसान ने जीवन मे कभी गलती नही की है , समझो उसने कभी कुछ करने का प्रयास ही नही किया इंसान से जब कोई गलती होती है, और आपका नज़रिया सकारात्मक है तो आप उस गलती से कुछ न कुछ जरूर सीख ले सकते है | उसके बाद जब आप ग़लतियों में सुधार करके नए प्रयास करते है तो आपके सफल होने के चांस बढ़ जाते है |

आपको दुनिया मे ऐसे लाखों करोड़ो उदाहरण मिल जाएँगे जिन्होंने अपने जीवन मे अनेको बार असफलता का सामना किया है , लेकिन वे आज दुनिया के टॉप अमीरो की लिस्ट में है | आप एक बार सोचकर देखिए | अगर वे एक दो बार असफल होने के बाद डर की वजह से प्रयास करना बंद कर देते तो क्या आज वे इतना बड़ा मुकाम हासिल कर पाते , इसलिए डर को अंदर से निकाल फेकिये और वह कार्य करिये जिसमे आपको लगता हो कि आप सफल हो सकते है |

डर पर आधारित एक कहानी :-

दित्तीय विश्वयुद्द में नेवी ने यह फैसला किया कि उनके सभी नए रंगरूटों को तैरना आना चाहिए । इसके पीछे यह विचार था कि तैरना आने से किसी डूबते आदमी की जान बचाई जा सकती है । जिन लोगों को तैरना नहीं आता था उनके लिए तैरने की कक्षाएँ आयोजित की गई । मैंने इस तरह के एक प्रशिक्षण को देखा । सतही तौर पर यह देखना मज़ेदार था कि इतने बड़े – बड़े , जवान , और स्वस्थ लोग कुछ फुट गहरे पानी में कूदने से घबरा रहे थे । इन लोगों को 6 फुट ऊँचे स्टैंड से पानी में कूद-ना था और पानी सिर्फ 8 फुट गहरा था । हालाँकि आस – पास बहुत से विशेषज्ञ तैराक खड़े थे और जान का कोई जोखिम नहीं था फिर भी ये वयस्क लोग बुरी तरह आतंकित थे ।

गहराई से सोचने पर यह दुःखद प्रसंग था । उनका डर वास्तविक था । परंतु उनमें और हार के डर के बीच में केवल एक ही चीज़ आड़े आ रही थी , और वह थी नीचे के पानी में छलाँग । एक से ज्यादा बार मैंने देखा कि इन युवकों को बोर्ड से अनपेक्षित धक्का दे दिया गया । और इसका परिणाम यह हुआ कि पानी से उनका डर हमेशा के लिए दूर हो गया ।

हज़ारों भूतपूर्व नेवी के जवान इस घटना से परिचित होंगे । इस घटना से हमें यह शिक्षा मिलती है :

काम करने से डर दूर होता है । दुविधा में रहने या अनिर्णय की स्थिति में रहने से या काम टालने से हमारा डर बढता है ।

इस लेख में हमने आपको डर के बारे में बताया है कि डर इंसान के अंदर किन कारणों की वजह से पैदा होता है और आपको डर दूर करने के लिए किन किन बातो का ख्याल रखना जरूरी है ! अगर आपको ये आर्टिक्ल पसंद आया हो तो हमे कमेंट करके बताये की आपको हमारी कौन सी बात अच्छी लगी और इस आर्टिक्ल को होने दोस्तों में भी शेयर करे ताकि उन्हें भी इसके बारे में पता कल सके !

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